Not known Details About Shodashi

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Oh Lord, the learn of universe. You are definitely the Everlasting. You are definitely the lord of each of the animals and every one of the realms, you will be the base with the universe and worshipped by all, with out you I am nobody.

श्री-चक्रं शरणं व्रजामि सततं सर्वेष्ट-सिद्धि-प्रदम् ॥९॥

सानन्दं ध्यानयोगाद्विसगुणसद्दशी दृश्यते चित्तमध्ये ।

Worshippers of Shodashi request don't just material prosperity but also spiritual liberation. Her grace is alleged to bestow both equally worldly pleasures along with the suggests to transcend them.

देवीं मन्त्रमयीं नौमि मातृकापीठरूपिणीम् ॥१॥

ऐसा अधिकतर पाया गया है, ज्ञान और लक्ष्मी का मेल नहीं होता है। व्यक्ति ज्ञान प्राप्त कर लेता है, तो वह लक्ष्मी की पूर्ण कृपा प्राप्त नहीं कर सकता है और जहां लक्ष्मी का विशेष आवागमन रहता है, वहां व्यक्ति पूर्ण ज्ञान से वंचित रहता है। लेकिन त्रिपुर सुन्दरी की साधना जोकि श्री विद्या की भी साधना कही जाती है, इसके बारे में लिखा गया है कि जो व्यक्ति पूर्ण एकाग्रचित्त होकर यह साधना सम्पन्न कर लेता है उसे शारीरिक रोग, मानसिक रोग और कहीं पर भी भय नहीं प्राप्त होता है। वह दरिद्रता के अथवा मृत्यु के वश में नहीं जाता है। वह व्यक्ति जीवन में पूर्ण रूप से धन, यश, आयु, भोग और मोक्ष को प्राप्त करता है।

हव्यैः कव्यैश्च सर्वैः श्रुतिचयविहितैः कर्मभिः कर्मशीला

Chanting the Mahavidya Shodashi Mantra results in a spiritual shield all over devotees, safeguarding them from negativity and destructive influences. This mantra functions to be a source of defense, assisting people today manage a favourable natural environment totally free from psychological and spiritual disturbances.

श्रीचक्रवरसाम्राज्ञी श्रीमत्त्रिपुरसुन्दरी ।

Sati was reborn as Parvati towards the mountain king Himavat and his spouse. There was a rival of gods named Tarakasura who might be slain only because of the son Shiva and Parvati.

श्री-चक्रं शरणं व्रजामि सततं सर्वेष्ट-सिद्धि-प्रदम् ॥५॥

सर्वोत्कृष्ट-वपुर्धराभिरभितो देवी समाभिर्जगत्

इसके अलावा त्रिपुरसुंदरी देवी अपने नाना रूपों में भारत के विभिन्न प्रान्तों में पूजी जाती हैं। वाराणसी में राज-राजेश्वरी मंदिर विद्यमान हैं, जहाँ देवी राज राजेश्वरी(तीनों लोकों की रानी) के रूप में पूजी जाती हैं। कामाक्षी स्वरूप में देवी तमिलनाडु के कांचीपुरम में पूजी जाती हैं। मीनाक्षी स्वरूप में देवी का विशाल भव्य मंदिर तमिलनाडु के मदुरै में हैं। बंगाल के हुगली जिले में बाँसबेरिया नामक स्थान में देवी हंशेश्वरी षोडशी (षोडशी महाविद्या) नाम से पूजित हैं।

Hadi mantras more info are known for their electricity to purify and are typically employed for cleaning rituals and preparatory practices.

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